जीजिविषा
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मैं दंगो में मरा हूँ सौ बार
मुझे जीने तो दो एक बार
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जाग दर्द ए मुल्क जाग
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जाग दर्द ए मुल्क जाग
साख हो रही है राख
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जाँच/साँच
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जाँच/साँच
को
नहीं आँच
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आत्म मुग्ध सरकार आईना नहीं देखती
माबदोलत बस आईना ही देखते हैं
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