राम का पुन:निर्वासन
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राम कैसे वापस आओगे
रहते थे जन जन के मन में
घट घट के वासी
घट मरघट बना
तुम्हें पुन:निर्वासित किया
मन से निकाला
सत्ता की सीढ़ी बनाया
राजनीति के जंगल में उलझाया
छुपा दी खड़ाऊँ भरत कुमारों ने
राम तुम्हारा मंदिर होगा
भव्य मूर्ति भी होगी
तुम न होंगे प्राण न होंगे
☘ जसबीर चावला
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