हमनें सुनी है पैरों की आवाज
-----------------------------
सुना है मुल्क का बादशाह बड़ा सख्त है
हर एक की मुश्कें कसना उसकी खब्त है
दामन पर दाग उसके कई कई हजार
हमनें सरेआम पढ़ी उसकी सरगगुजश्त है
लोहे का क़िला है उसका फिर भी सुराख़ हैं
परिंदा पर न मारे ऐसा इश्तिहारी बंदोबस्त है
कुछ लोग अदालतों में यूँ ही सर पीटते हैं
पता चला कि आईन ताले में इधर जप्त है
शोर मचानें के लिये लगायें हैं नगाड़े कई
धीरे से बोल देता आवाम बडा कमबख़्त है
तूफ़ाँ की आवाज को बहरे कहाँ सुनते हैं
हमनें सुनी है पैरों की आवाज ज़बरदस्त है
( मुश्कें कसना -पीछे भुजाएँ बाँधना / सरगुजश्त-जीवनी / इश्तिहारी-विज्ञापित / आईन-संविधान )
No comments:
Post a Comment