तुम्हारी चुप्पी
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टूटी मान मर्यादा
न टूटी तुम्हारी चुप्पी
तुम्हारी चुप्पी क्या है ?
शस्त्र है ढाल या कवच है ?
सच क्या है ?
०
तुम्हारी चुप्पी
घमंड है
पाखण्ड है
भ्रम है माला है
जो टूटते ही बिखर जायेगी
बेनक़ाब कर देगी तुम्हें
यही सच है.
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