काग भगौड़ा ~ ~ ~ ~ ~ ~ ᒍᗩᔕᗷIᖇ ᑕᕼᗩᗯᒪᗩ
Wednesday, December 4, 2013
कल और आज
कल और आज
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कल और आज
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कल के खंडहर बतलाते हैं
इमारत बुलंद थी
आज का मलवा बतलाता है
इमारत भ्रष्ट थी
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