राम ही जानें
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हम उग्र हो गये हैं
खौलता रहता है ख़ून
बदल गया स्वभाव
सदा तनी रहती मुट्ठियाँ
उद्विग्न रहते हैं
हिक़ारत ओर ग़ुस्सा चेहरे का स्थाई भाव बना
पहले मिलते प्रेम से कहते थे
उद्विग्न रहते हैं
हिक़ारत ओर ग़ुस्सा चेहरे का स्थाई भाव बना
पहले मिलते प्रेम से कहते थे
भैया राम राम
राम अब नारा बना
चिल्लाकर कहते हैं जय श्री राम
चिल्लाकर कहते हैं जय श्री राम
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