संतोषी
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वे दौड़े तेज
खूब तेज
दूसरों को ढकेलते
पीछे छोड़ते
गिरे औंधे मुंह धड़ाम
उच्चतम न्यायालय में काम तमाम
वे भी दौड़े दौड़ रहे
फर्राटे से
फूली साँस हांफ रहे
०
वे चल रहे हैं कभी धीरे कभी मध्यम
लौटते भी हैं उल्टे पाँव कभी कभार
देख छांव
मुदित मन अब भी चल रहे हैं
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वे दौड़े तेज
खूब तेज
दूसरों को ढकेलते
पीछे छोड़ते
गिरे औंधे मुंह धड़ाम
उच्चतम न्यायालय में काम तमाम
वे भी दौड़े दौड़ रहे
फर्राटे से
फूली साँस हांफ रहे
०
वे चल रहे हैं कभी धीरे कभी मध्यम
लौटते भी हैं उल्टे पाँव कभी कभार
देख छांव
मुदित मन अब भी चल रहे हैं
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