Friday, December 13, 2013

क्योंकि तुम 'तुम' हो

क्योंकि तुम 'तुम' हो
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तुम 'तुम' हो
नाम तो तुम्हारा ही लिया जायेगा

तुम बोलो तो चर्चा तुम्हारा होगा
ना बोलो तो भी
क्योंकि 'तुम' हो
चुनाव प्रदेश में हों या देश में
राजनीति की बिसात पर मोहरे तुम ही होंगे
तुम्हारी हैसियत होगी मात्र बिंदू
पर तुम होंगे केन्द्र बिंदू

तुम्हारे में विवेक है नहीं मानते
तुम तो भीड़ हो / भेड़ चाल हो
वोट बैंक हो
तुम्हारे हित का हर काम तुष्टिकरण

होंगी जात पाँत तुममे भी अनेक
अलग फिरके / अलग जमातें
अलग सियासी रुझान
अकीदा तो एक है
इतना ही काफ़ी है तुम्हारे ख़िलाफ़ भड़कनें के लिये
क्योंकि तुम 'तुम' हो



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