जूते और जोड़ाघर
——————-
आज आख़िर उन्होंने छुटकारा पा ही लिया
लंबे समय से साथी थे
ब्रांडेड एक जोड़ी जूते
*
पहन कर उन्हें देश विदेश खूब चले
हिमालय की तलहटी,बस्तर के जंगलों में
कलकत्ता की सड़कों से मुंबई के बंगलो मे
काहिरा से सेनफ्रांसिस्को में
मंदिरों,गुरूद्वारों,मजारों में
गुरुद्वारों में होता है 'जोड़ा घर'
जूतों की सफ़ाई करते भक्त
बहुत रक्षा की इन जूतों ने पांवो की
कीचड़,कंकड़,काँटों से
ऊंची नीची धरातल पर बेख़ौफ़ चले जूते
अब तले घिस गये उनके
रंग बदरंग हुआ झुर्रीयां पड़ी
चमक जाती रही
बच्चे भी कहने लगे छुटकारा पा लो इनसे
किसी काम के नहीं रहे
बू आती है अच्छे नहीं लगते
आख़िर उन्होंने डस्टबीन में फेंक दिये जूते
**
एक जोड़ा और था उसी घर में
पड़ गई उसके भी झुर्रियाँ उड़ी रंगत
पर चस्पा था अनुभव अतीत का
बच्चों की खातिर वह खूब चला ख़ूब घिसा
उनके स्वपनिल रंगो के लिये जिया था
अब पक चुका था
थक चुका था
पता नहीं चुक चुका था ?
**
खबर आई शहर के 'ओल्ड होम' में ख़ाली है कमरा
मिल जायेगा जोड़े को
कई 'सुखी जोड़े’ हैं इस 'जोड़ा घर' में
उस दिन बिदा हुए
'दो जोड़े' उस घर से
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आज आख़िर उन्होंने छुटकारा पा ही लिया
लंबे समय से साथी थे
ब्रांडेड एक जोड़ी जूते
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पहन कर उन्हें देश विदेश खूब चले
हिमालय की तलहटी,बस्तर के जंगलों में
कलकत्ता की सड़कों से मुंबई के बंगलो मे
काहिरा से सेनफ्रांसिस्को में
मंदिरों,गुरूद्वारों,मजारों में
गुरुद्वारों में होता है 'जोड़ा घर'
जूतों की सफ़ाई करते भक्त
बहुत रक्षा की इन जूतों ने पांवो की
कीचड़,कंकड़,काँटों से
ऊंची नीची धरातल पर बेख़ौफ़ चले जूते
अब तले घिस गये उनके
रंग बदरंग हुआ झुर्रीयां पड़ी
चमक जाती रही
बच्चे भी कहने लगे छुटकारा पा लो इनसे
किसी काम के नहीं रहे
बू आती है अच्छे नहीं लगते
आख़िर उन्होंने डस्टबीन में फेंक दिये जूते
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एक जोड़ा और था उसी घर में
पड़ गई उसके भी झुर्रियाँ उड़ी रंगत
पर चस्पा था अनुभव अतीत का
बच्चों की खातिर वह खूब चला ख़ूब घिसा
उनके स्वपनिल रंगो के लिये जिया था
अब पक चुका था
थक चुका था
पता नहीं चुक चुका था ?
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खबर आई शहर के 'ओल्ड होम' में ख़ाली है कमरा
मिल जायेगा जोड़े को
कई 'सुखी जोड़े’ हैं इस 'जोड़ा घर' में
उस दिन बिदा हुए
'दो जोड़े' उस घर से
- जसबीर चावला
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