Wednesday, December 4, 2013

खबर है कि कोई खबर नहीं

खबर है कि कोई खबर नहीं
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केलिफोर्निया के जंगलो मे भीषण आग
चीन की कोयला खदानों मे विस्फोट
बंगलादेश में भयंकर बाढ़
सैकडों मरे लाखों बेघरबार
जापान में भूकंप
हिंद महासागर में सोमाली डाकूओं का जहाजों पर हमला
बँधक लाखों डालर में रिहा
घर वालों के आरोप सरकार की ढिलाई
पेशावर/करांची/बगदाद/ गाजा पट्टी
बसों /स्कूलों /मस्जिदों में/बमों के आत्मघाती हमले
शिया/सुन्नी/अहमदिये/कादियानी मसले
फ्लोरिडा/ ओखलाहोमा में तूफान
न्यूयार्क/शिकागो में कई फुट गहरी बर्फ की चादर
रोज की सुर्खियां हैं अखबारी पन्नो की
बेमन से उड़ती निगाह वाली सुर्खियां
वहां ऐसा ही होता है
ऐसा ही होना है
कोई संवेदना/स्फुरण/स्पंदन नहीं
सिहरन/उत्सुकता/सहानुभूति नहीं
न मन तनिक रुकता/अटकता/सोचता है
न ही चाय के प्याले में तूफान आता है
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मेरे देश के हर शहर/गांव मे
हत्या/लूट/बलात्कार/चोरी
डकेती/आगजनी/सीनाजोरी
भारतीय दंड विधान की हर धारा
घट रही हर पल/क्षण
टेक्सचोरी/जांचे/छापे
रोज नये जांच आयोग
किस किस को नापें
हर वाहन/रेल/टकरानें/ के लिये
हम अभिशप्त हैं
लू से/शीत लहर/बाढ़/आग से मरने के लिये
हर त्रासदी के लिये
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दिन प्रतिदिन/हर माह/ हर साल
खबरें नहीं अखबारी कर्मकांड
गढी हुई प्रायोजित पेड खबरें
एक ही शब्दावली
बेरंग/बेरस खबरें
कब नहीं घटी ये घटनाएं
कल भी/आज भी/कल भी घटेगी
चौंकना कैसा
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किस किस को याद कीजिये
किस किस को रोईये
आराम बड़ी चीज है
अखबार ढक के सोईये
...?

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