वे न दुआ करते हैं न दवा करते हैं
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वे न दुआ करते हैं
न वे दवा करते हैं
*
बोते हैं ज़हर के बीज
समाज में घृणा रोपते हैं
*
किसी पर रहम नहीं आता
लोग घुटघुट के मरते हैं
*
वे बस पलिता लगाते हैं
देश में बारूद भरते हैं
*
आत्मा मर चुकी उनकी
वे विद्रूप से हंसते हैं
*
हिंसक हुआ चेहरा उनका
जिसे लोग देख डरते हैं
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वे न दुआ करते हैं
न वे दवा करते हैं
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बोते हैं ज़हर के बीज
समाज में घृणा रोपते हैं
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किसी पर रहम नहीं आता
लोग घुटघुट के मरते हैं
*
वे बस पलिता लगाते हैं
देश में बारूद भरते हैं
*
आत्मा मर चुकी उनकी
वे विद्रूप से हंसते हैं
*
हिंसक हुआ चेहरा उनका
जिसे लोग देख डरते हैं
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