विक्रम बेताल और भ्रूण
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विक्रम ने हठ न छोड़ा
बेताल को फिर लाद लिया कंधे
बेताल बोला जंगल हिंस्र है
क्यों न चलें सभ्य शहर के रास्ते
विक्रम ने हठ न छोड़ा
बेताल को फिर लाद लिया कंधे
बेताल बोला जंगल हिंस्र है
क्यों न चलें सभ्य शहर के रास्ते
राजमार्ग से चलेंगे
जहाँ बिखरें हैं परियों तितलियों के नर्म पंख
लटके हैं मासूम सपने
किलकारियों की गूँजे
गुड़ियाओं के टूटे अंग
खुली हैं जिधर सोनोग्राफी की दुकानें
'भ्रूण का लिंग परिक्षण नहीं होता'
नन्हें हाथों के रक्तरंजित छापों से भरी अस्पतालों की दीवारें
इस सभ्य मार्ग पर सिसकती हैं लोरियाँ
‘नन्ही सी परी मेरी लाड़ली’
‘चंदन का पलना रेशम की डोरी’
चिर निद्रा में सोई राजकुमारियाँ
हाथों से गला घोंटती अफ़ीम चटाती दाईयाँ
गा रही नये ज़माने की लोरियाँ
'लली ऊपर जईयो लला को भेज दीजो'
*
बेताल विक्रम से बोला कौन रास्ता अच्छा है
विक्रम काँप कर बोला
जहाँ बिखरें हैं परियों तितलियों के नर्म पंख
लटके हैं मासूम सपने
किलकारियों की गूँजे
गुड़ियाओं के टूटे अंग
खुली हैं जिधर सोनोग्राफी की दुकानें
'भ्रूण का लिंग परिक्षण नहीं होता'
नन्हें हाथों के रक्तरंजित छापों से भरी अस्पतालों की दीवारें
इस सभ्य मार्ग पर सिसकती हैं लोरियाँ
‘नन्ही सी परी मेरी लाड़ली’
‘चंदन का पलना रेशम की डोरी’
चिर निद्रा में सोई राजकुमारियाँ
हाथों से गला घोंटती अफ़ीम चटाती दाईयाँ
गा रही नये ज़माने की लोरियाँ
'लली ऊपर जईयो लला को भेज दीजो'
*
बेताल विक्रम से बोला कौन रास्ता अच्छा है
विक्रम काँप कर बोला
जंगल भ्रूण हत्या नहीं करता
लिंग का परीक्षण नहीं करता
शहर निर्मम है क्रूर हैं
शहर मे जंगल का कानून नहीं चलता
शव फिर उड़ा पेड़ पर लटक गया
नये कन्या भ्रूण लटक गये थे जहाँ
लिंग का परीक्षण नहीं करता
शहर निर्मम है क्रूर हैं
शहर मे जंगल का कानून नहीं चलता
शव फिर उड़ा पेड़ पर लटक गया
नये कन्या भ्रूण लटक गये थे जहाँ
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