विक्रम ने फिर हठ न छोड़ा
पहले बेताल से सुन चुका था
पच्चिस कहानियाँ
कहानी सुना बेताल कहता
प्रश्न का ठीक उत्तर न दिया तो सिर टुकड़े हो जायेगा उसका
विक्रम उत्तर देता
बेताल उड़ता हर बार
पेड़ पर लटक जाता
*
विक्रम बोला
बारी ख़त्म हुई तुम्हारी
सुना चुके घिसी पिटी पच्चिस कहानियाँ
इस राजा उस साहूकार की
रूपवती सुंदरीयों की
बहुत बोर किया सुनता रहा
अब मेरी बारी
ठीक उत्तर मिला तो दिला दूँगा शव से मुक्ति
ज़िंदा होकर मनुष्य बन जाओगे
भारत में रह पाओगे
*
सुन शव रोने लगा
किसी प्रश्न का उत्तर दूँगा नहीं तुम्हारे
ज़िंदा शव बनने से अच्छा है बेताल शव ही रहूँ
मुझे नहीं जीना
*
बेताल ने कहा और उड़ा
पेड़ पर लटक गया फिर से
अब विक्रम ने भीहठ छोड़ दिया
पहले बेताल से सुन चुका था
पच्चिस कहानियाँ
कहानी सुना बेताल कहता
प्रश्न का ठीक उत्तर न दिया तो सिर टुकड़े हो जायेगा उसका
विक्रम उत्तर देता
बेताल उड़ता हर बार
पेड़ पर लटक जाता
*
विक्रम बोला
बारी ख़त्म हुई तुम्हारी
सुना चुके घिसी पिटी पच्चिस कहानियाँ
इस राजा उस साहूकार की
रूपवती सुंदरीयों की
बहुत बोर किया सुनता रहा
अब मेरी बारी
ठीक उत्तर मिला तो दिला दूँगा शव से मुक्ति
ज़िंदा होकर मनुष्य बन जाओगे
भारत में रह पाओगे
*
सुन शव रोने लगा
किसी प्रश्न का उत्तर दूँगा नहीं तुम्हारे
ज़िंदा शव बनने से अच्छा है बेताल शव ही रहूँ
मुझे नहीं जीना
*
बेताल ने कहा और उड़ा
पेड़ पर लटक गया फिर से
अब विक्रम ने भीहठ छोड़ दिया
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