Tuesday, December 31, 2013

चूहे बस चूहे

चूहे बस चूहे
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आज़ादी के बाद
आज़ादी से 'चूहे' बढ़ते जा रहे चूहे
चूहों की तरह
सरकारी दफ़्तरों की फ़ाईलों में
रक्षा / वित्त / शिक्षा / की मुँडेर पर
न्याय के चोग़े में चूहे
प्रदेश / देश के हर विभाग में चूहे
निर्णयों की भूलभुलैया में
हस्ताक्षर के घुमाव पर बैठे
यत्र तत्र सर्वत्र चूहे ही चूहे
हर रंग जाति के चूहे

बिलों में खींचते / टेंडर/ खदानें / ठेके
तेल / गैस / हवा/ पानी / जंगल / ज़मीन
क्या नहीं कुतरते चूहे
ईमान / धर्म / ज़मीर
कार्यपालिका में भी मुस्तेद चूहे 
अदालतों में बरसों चलते मुकदमे 
चूहे गवाह चूहे जाँच अधिकारी
'चूहा न्याय' में बाइज़्ज़त छूटते चूहे
मेरा देश 'करणी माता का मंदिर' हुआ
जहाँ बस चूहे चूहे ही चूहे




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