शहर में विकास
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बहुत विकास हुआ बिना किसी रोक
टाऊनशिप माल मल्टीप्लेक्स
पहले होता था एक मजदूर चौक
अब मजदूरों की मण्डी
पशु हाट से ठीये पचास
कारीगर मिलते थोक
भिनभिनाते मजदूर
मोलभाव करता ठेकेदार
सब्जी की तरह छांटता
मजदूरनों को सटाकर बिठाता
बाईक पर बिना किसी रोक
बढ़ रही गंदी बस्तियाँ
गगनचुंबी इमारतें
विकास या जीवन का शोक
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बहुत विकास हुआ बिना किसी रोक
टाऊनशिप माल मल्टीप्लेक्स
पहले होता था एक मजदूर चौक
अब मजदूरों की मण्डी
पशु हाट से ठीये पचास
कारीगर मिलते थोक
भिनभिनाते मजदूर
मोलभाव करता ठेकेदार
सब्जी की तरह छांटता
मजदूरनों को सटाकर बिठाता
बाईक पर बिना किसी रोक
बढ़ रही गंदी बस्तियाँ
गगनचुंबी इमारतें
विकास या जीवन का शोक
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