Tuesday, December 3, 2013

इतिहास तो इतिहास है

 इतिहास तो इतिहास है
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उन्होंने मगध वैशाली पाटलिपुत्र का इतिहास खंगाला 
स्वर्णाक्षरों से लिखी नायकों की गाथाएँ देखी  
अशोक से अकबर तक के पुरातात्विक शिलालेख पढ़े 

सोचा वे भी ‘इतिहास’ बनाएँगे 
उनके बुत चौराहों बस्तियों में लगेंगे

उनका आदेश हुआ
आदेश का पालन हुआ
ग्रेनाइट संगमरमर के बुत बने 
नकली स्वर्णाक्षर से शिलालेखों पर प्रशस्ति उकेरी गई
अपने कर कमलों से बुतों का खुद ही उद्घाटन किया


निजाम बदला
बुत ढक दिये गये 
कुछ गिराये / हटाये / पोते गये
अपने भार से कुछ औंधे मुँह गिरे
शिलालेख तोड़े गये
उनके जीते जी यह भी दर्ज हुआ इतिहास में
आख़िर वे आ ही गये इतिहास में

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