ईशान कोण : फील सेड
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कौरवों की पराजय हुई
किसी पाँडव के मन में ख्याल आया
जो हारे,जो मर गये
हमारे अपने थे सखा-बंधु
सभी पाँडवों में साँझा हुआ यह विचार
क्यों हुआ भीषण रक्तपात
क्या अपरिहार्य था युद्ध ?
क्या अंतिम विकल्प था युद्ध ?
भर गया सबका मन आत्म ग्लानि से
पश्चाताप,निस्सारता,वितृष्णा से
प्रायश्चित होगा
चल पड़े पांडव द्रौपदी और कुत्ते के संग
ईशान कोण में हिमालय की और
कोई नहीं जानता इन दिनों
फ़ील गुड / फील सेड से परे
हिंसक घटाटोप में
कहीं कोई खोज रहा है अपना ईशान कोण
अपना हिमालय
अपने हिस्से की ग्लानि
अपना पश्चाताप
अपना धर्म
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कौरवों की पराजय हुई
किसी पाँडव के मन में ख्याल आया
जो हारे,जो मर गये
हमारे अपने थे सखा-बंधु
सभी पाँडवों में साँझा हुआ यह विचार
क्यों हुआ भीषण रक्तपात
क्या अपरिहार्य था युद्ध ?
क्या अंतिम विकल्प था युद्ध ?
भर गया सबका मन आत्म ग्लानि से
पश्चाताप,निस्सारता,वितृष्णा से
प्रायश्चित होगा
चल पड़े पांडव द्रौपदी और कुत्ते के संग
ईशान कोण में हिमालय की और
कोई नहीं जानता इन दिनों
फ़ील गुड / फील सेड से परे
हिंसक घटाटोप में
कहीं कोई खोज रहा है अपना ईशान कोण
अपना हिमालय
अपने हिस्से की ग्लानि
अपना पश्चाताप
अपना धर्म
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