मैं और कविताएँ
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अकेला जाता हूं सुबह
कुछ साथ हो लेती
कुछ थोड़ी देर संग करती
ग़ायब हो जाती
कई दूर तक साथ निभाती
कुछ वाचाल / जल्दी पीछा छोड़ देती
लौट लौट आती कई स्मृति पटल पर
कोई और साथ हों तो
गुरेज करती / चुप लगाती
बीच बीच में
दस्तक भी देती
जो घर तक आती
वे घर कर जाती
मजबूर करती हैं
अब उन्हे न छेड़ा जाये / न छोड़ा जाये
एक साथ हमला करती अभिसारिकाएँ
ये कविताएं
कुछ साथ हो लेती
कुछ थोड़ी देर संग करती
ग़ायब हो जाती
कई दूर तक साथ निभाती
कुछ वाचाल / जल्दी पीछा छोड़ देती
लौट लौट आती कई स्मृति पटल पर
कोई और साथ हों तो
गुरेज करती / चुप लगाती
बीच बीच में
दस्तक भी देती
जो घर तक आती
वे घर कर जाती
मजबूर करती हैं
अब उन्हे न छेड़ा जाये / न छोड़ा जाये
एक साथ हमला करती अभिसारिकाएँ
ये कविताएं
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