Monday, December 30, 2013

क्या खोया क्या पाया

क्या खोया क्या पाया
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दंगों में बचपन ही नहीं गुमा
खिलोनें भी खो गये
दूधमुँही तुतलाहट गई
गिल्ली डंडा कोड़ा जमालशाही
बरसों का याराना गया
शर्म हया उड़ी आँख का पानी मरा
रिश्ते तिड़के स्वाभिमान टूटा
बहू बेटी ने अस्मत खोई
रोटी गई रोज़गार गया
लुटे खेत खलिहान
आग बरसी जले मकान
इंसान मरा

पाया क्या
उग्र साम्प्रदायिकता आतंक
डरावने सपने दुश्मनी सतत नफरत
बच्चों में भय बेचेनी
जीवन भर की उदासी
कुंठा कुटिल राजनीति
धर्म के नाम पर अधर्म
थोड़े से वोट
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