Saturday, February 22, 2014

ख़ुदा खुदाई और ख़िदमतगार


ख़ुदा खुदाई और ख़िदमतगार
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एक दो मोहल्ले नहीं हर तरफ़  ख़ुदा रखा है
किस ख़ुदा की बात करूँ शहर ख़ुदा रखा है.

किस तरफ़ से किधर जायें पता वहीं चलता
परेशाँ  हर बशर हर विभाग ने ख़ुदा   रखा है.

दिन रात खुदाई से आजिज़ ख़ुदा कहाँ जाये 
खुदा बंदों से खुद पूछे बता कहाँ ख़ुदा रखा है.

देख ली तेरी खुदाई  ज़रा इनकी खुदाई देख
इसने भी खुदा रखा है उसने भी ख़ुदा रखा है.

ख़ुदा को सजदा करने चले ख़ुदा के नेक बंदे
खुदा की हर राह को भी इन्होंने  ख़ुदा रखा है.

                  🦉 जसबीर चावला

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