Monday, February 24, 2014

आठ कणिकाएं

आठ कणिकाएं
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बीते
दिन रीते
~*~
रूक
मत झुक
~*~
आई
रुकी गई
~*~
आग
गई जाग
~*~
प्रेम
खुला फ्रेम
~*~
रात
खुला गात
~*~
दिन
तारे गिन
~*~

पल
आना कल




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