Wednesday, September 14, 2016

भेडों का प्रजातंत्र

भेडों का प्रजातंत्र 

भेड़ें भेड़चाल चलती हैं
कभी कभी ईवीएम से खेलती हैं
भेड़ों के सौदागरों को नींद नहीं आती 
बार बार उठकर भेड़ें गिनते हैं          
काली भेड़े छाँटते हैं
सत्ता का रसायन लगाते 
सफेद बनाते हैं
भेड़ों से भीड़तंत्र बनता है
उधर प्रजातंत्र के मुखोटे में भेड़िया चुपचाप आ जाता है

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