शिक्षक दिवस:दिवंगत प्रो.सब्बरवाल को श्रद्धांजलि
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एक अर्थी उठी 'संदिपनी आश्रम' से
द्रौण तुम हो कौन
शिष्य केमरे पर कहता
गुरू कलंक है कोढ़ है
सच में शिष्य बेजोड़ है
शिष्य अब अंगूंठा नहीं कटवाते
गुरू से पोंछा लगवाते
विद्यार्थी जो विद्या की अर्थी उठाये रखते हैं
पीट कर शव बनाते हैं
'कहा था कौटिल्य ने गुप्तकाल' में
पलते हैं निर्माण प्रलय शिक्षक की गोद में
काल का फ़र्क़ अब कुछ गुप्त नहीं
घट रहा सबके सामने
विध्वंस ही निर्माण है
हिंसा ही लक्ष्य है
🌿 जसबीर चावला
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एक अर्थी उठी 'संदिपनी आश्रम' से
द्रौण तुम हो कौन
शिष्य केमरे पर कहता
गुरू कलंक है कोढ़ है
सच में शिष्य बेजोड़ है
शिष्य अब अंगूंठा नहीं कटवाते
गुरू से पोंछा लगवाते
विद्यार्थी जो विद्या की अर्थी उठाये रखते हैं
पीट कर शव बनाते हैं
'कहा था कौटिल्य ने गुप्तकाल' में
पलते हैं निर्माण प्रलय शिक्षक की गोद में
काल का फ़र्क़ अब कुछ गुप्त नहीं
घट रहा सबके सामने
विध्वंस ही निर्माण है
हिंसा ही लक्ष्य है
🌿 जसबीर चावला
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