अफ़ग़ानिस्तान में कोड़े से पिटती ख्वातीन
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भरी भीड़ में अकेली औरत
धूप में तमाशा बनी औरत
मज़हब के नाम बुत बनी औरत
कोड़े पे कोड़ा खाती औरत
क़तरा क़तरा ज़िबह होती औरत
आह न भरती औरत
कहाँ है आपा अम्मी बीवी बेटी औरत
सारे रिश्तों के व़जूद नकारती औरत
एक जिंस बनी औरत
सिर्फ एक जिस्म है औरत
औरत है तो बस औरत
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