Friday, January 15, 2016

अफ़ग़ानिस्तान में कोड़े से पिटती ख्वातीन

अफ़ग़ानिस्तान में कोड़े से पिटती ख्वातीन 
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बुरक़े के ऊपर चादर ओड़े औरत
भरी भीड़ में अकेली औरत 
धूप में तमाशा बनी औरत
मज़हब के नाम बुत बनी औरत
कोड़े पे कोड़ा खाती औरत 
क़तरा क़तरा ज़िबह होती औरत
आह न भरती औरत
कहाँ है आपा अम्मी बीवी बेटी औरत
सारे रिश्तों के व़जूद नकारती औरत
एक जिंस बनी औरत
सिर्फ एक जिस्म है औरत
औरत है तो बस औरत




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