इतना सन्नाटा क्यों है
———————-
चुप रहा
असमिया नहीं था
चुप रहा
उत्तर पूर्व के राज्यों से जुड़ा नहीं था
चुप रहा
दक्खिन का नहीं था
चुप रहा
मुसलमान नहीं था
चुप रहा
आदिवासी दलित नहीं था
चुप रहा
आज मेरे दरवाज़े ठक ठक है
बंदूक़ की बट से टूट रहा दरवाज़ा
खिड़कियों से कोई क्यों नहीं झांक रहा ?
आज मोहल्ले में इतना सन्नाटा क्यों है ?
☘️ जसबीर चावला
No comments:
Post a Comment