इस वीडियो के कुछ दृष्य विचलित कर सकते हैं
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अब कोई वीडियो विचलित नहीं करता
न करेगा
सात घंटे तपती धूप में खंबे से बँधा तबरेज अंसारी
पिटता रहा
मर गया तबरेज अंसारी
सबने देखा
कोई विचलित न हुआ
सब भीड़ में तमाशबीन थे
सब भीड़ में तमाशबीन थे
हौंसला अफजाई थे
*
कहाँ तक विचलित हों अब
मर चुकी चेतना
कब तक रोयें ?
*
सामूहिक बलात्कार हो या हत्या
मूक दृष्टा हैं हम
क्या हम गुनाहगार हैं ?
क्या हम भी भागीदार हैं ?
☘ जसबीर चावला
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