Friday, June 7, 2019

गोबरज्ञान एवं अन्य १

गोबरज्ञान एवं अन्य 
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उनके 'गोबर विज्ञान' से सहमत हूँ,पर सीताजी 'टेस्ट ट्युब बेबी' नहीं थी.
उन्हें 'कुँभ कन्या' या 'मटका बेबी' कहा जाना चाहिये.
 😜 
'कुछ लोग' आदमी को मार कर 'मुर्दा' बनाते हैं.
फिर मुर्दे को राजनैतिक 'मुद्दा' बनाते हैं.
😢
मुगलसराय स्टेशन दीन दयाल उपाध्याय स्टेशन हुआ 
मुग़लई चिकन का नाम क्या होगा ?
 😜 
मुगलसराय स्टेशन का नाम बदल कर पंडित दीनदयाल उपाध्याय हुआ-खबर
इस तरह आखिर हिंदुत्व नें मुग़लों से बदला लेकर स्टेशन पर बहादुरी से क़ब्ज़ा किया.
😀
पुस्तकें
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'सत्य के साथ मेरे प्रयोग' - महात्मा गाँधी
 'झूट के साथ मेरे प्रयोग' - महामना .....?
(दूसरी पुस्तक कई खंडों मे प्रकाशनाधीन है)
 😜 
व्यर्थ में किसी विधायक / सांसद मे अंतरात्मा 
की खोज न करें.
अंतरात्मा बहुत पहले ही मर चुकी होती है
-स्वामी जसानंद
अंतरात्मा के मरनें के बाद ही 
विधायक / सांसद का जन्म होता है 

-स्वामी जसानंद
 😜 
विधायक और अंतरात्मा में साँप और नेवले जैसा संबध होता है

-स्वामी जसानंद
 😜 
केदार गुफा
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आदि मानव पहुँचा
केदार गुफा
नया जुमला 
फिर एक शिगूफ़ा 
😀

अब जसबीर चावला की पाठशाला में हिंदी की नई वर्णमाला पढ़ाई जा रही है
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अ-अंबानी,अडानी,अनुच्छेद ३७०,अंधेरे में तीर
आ-आर्थिक मंदी,आँसू 
इ -इज़्ज़त मिट्टी में मिलना 
ई-ईमान बेचना 
उ-उन्नाव,उल्लू बनाना,उंगली करना
 ऊ-ऊँची दुकान फीके पकवान
ऋ-ऋण डुबोना 
ए-एक न सुनना
ऐ-ऐश करना
ओ-ओस की बूँदों से हाथ धोना
औ-औने पौने करना 
अं-अंग ढीले पड़ना
क-कँगला,कारपोरेट,कश्मीर
ख-खँडहर,खटिया
ग-गड्डे ही गड्डे,गच्चा देना,गठरी बाँधना,गिरीराज सिंह
घ-घर उजाड़ना,घंटा बाबाजी का
च-चंडूखाना 
छ-छापे
ज-जुमला,जीएसटी 
झ-झूठे,झूठी शान,झगड़ालू
ट-टपोरी,टरकाना 
ठ-ठग,ठाट बाट
ड-डंडा,डमरु
ढ-ढपोरशंख,ढोल की पोल
ण-
त-तक्षक नाग,तड़ीपार
थ-थाना
द-दमन,दंश
ध-धृतराष्ट्र,धोखा,धूर्त
न-नोटबंदी,नीरव मोदी,नगाड़ा,नाम बड़े दर्शन खोटे
प-पतित,पतंजलि,पक्षपात,पूँजीवाद
फ-फासिज्म,फेंकू
ब-बगुला,बबुआ,बेकारी,बंदरबाँट,बाबरी
भ-भंडा फूटना,भट्टा बैठना,भय
म-मंदी,मत्स्य न्याय,मुलायम सिंह,मायावती
य-यम
र-रथयात्रा,रतिक्रीड़ा
ल-लुटिया डूबना,लंगूर,लालू
व-विजय माल्या,वानर
श-शनिचर
ष-षड्यंत्र करना
स-साधू और शैतान,सनम बेवफा,संकटाचार्य,संक्रमण
ह-हवन,हलाहल,हंटर
क्ष-क्षुद्र
त्र-त्रिशंकु,त्राहि त्राहि 
ज्ञ-ज्ञानचंद
       😜
@ जसबीर  चावला

प्रधानमत्री जी फेंको मगर दायरे में
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कल प्रधानमंत्रीजी के 'वर्ल्ड बायोफ्यूल डे' पर सुनाई तीन महान कहानियों में से कहानी नंबर दो की 'पोस्टमार्टम' रिपोर्ट.प्रधानमंत्रीजी के अनुसार वे जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे तो कारों के क़ाफ़िले में उन्होनें सड़क पर स्क्रूटर से जाते एक किसान को देखा.उसके पास ट्रेक्टर के टायर की भरी हुई ट्यूब(प्रधानमंत्री नें हाथ के इशारे और मुखमुद्रा से ट्रेक्टर के बड़े पहिये की ट्यूब बतलाई) थी.इतनी बड़ी की दूसरे वाहनों से टकरानें का खतरा था.
मोदीजी के अनुसार अगर वह ट्यूब में हवा ले जा रहा था तो उसे खाली कर दूसरे स्थान पर पहुँच कर भी भर सकता था(😀)इससे टकरानें का खतरा नहीं होता.अब उन्हें कौन बताये कि कोई भी ट्यूब में हवा का परिवहन नहीं करता.ट्यूब को टायर में फ़िट कर ही हवा भरी जाती है.
प्रधानमंत्री जो तब मुख्यमंत्री थे-उसे रोक कर पूछा कि यह क्या है.उसने बतलाया कि इस ट्यूब में उसके घर के कचरे ओर दो जानवरों के गोबर से बनी गैस है जिसे भर कर खेत में ले जाकर वह अपनें वाटर पंप को चलाता है.

सवाल नंबर 1 - प्रचारप्रिय मोदीजी की यह खबर क्या किसी टीवी/अखबार में छपी,जब पूरी सुरक्षा में चलने वाले मुख्यमंत्री का क़ाफ़िला रुका और मुख्यमंत्री नें स्कूटर रुकवाया और किसान से बात की ? सुरक्षा कारणों के चलते से क्या कोई व्यक्ति ऐसी भरी ट्यूब ले जा सकता है ? सड़कों का सारा ट्रेफिक घंटों रोक दिया जाता है.काफिलों के लिये रोकी गई एंबुलेंस में लोगों नें कई बार प्राण त्यागे हैं.

सवाल नं 2- क्या दो जानवरों और घर के कचरे से इतनी बायोगैस बन सकती है कि ट्यूब में भरी सके ? सामान्यत:८-१० व्यक्तियों के परिवार के कचरे से बने प्लांट से ३०-४० मिनट तक प्रतिदिन चलने वाली अधिकतम गैस बनती है.
सवाल नंबर 3- क्या घर के कचरे से बनी गैस किसी बड़े कंटेनर में स्टोर किये बिना,किसी कम्प्रेशर पंप/यंत्र की मदद के बिना ट्यूब में भरी जा सकती है ? क्या घर में ऐसा स्टोरेज संभव है ? उसकी लागत क्या होगी ?अगर ऐसा परिवहन सच में हो ही रहा था तो ज्वलनशील गैस का परिवहन ऐसे ट्यूब में होने देना क्या उचित था ?

सवाल नंबर 4- क्या ट्यूब में भरी बायोगैस किसी टंकी / टेंक में स्टोरेज किये बिना डायरेक्ट पानी के पंप से जोड़कर पंप चलाया जा सकता है ? अगर नहीं तो स्टोरेज टैंक/एक्सेसरीज़ मिलाकर लागत कितनी बढ जायेगी.
वैसे ऐसे पंपों का इस्तेमाल केवल प्रायोगिक स्तर पर ही है.
कहानी नंबर एक
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प्रधानमंत्रीजी नें समाचार पत्र में पढ़ा था(समाचार पत्र का नाम?)उनके अनुसार गंदे नाले के किनारे चाय का ठेला लगाने वाले नें पास के नाले की गैस पर (हाथ के इशारे से मोदीजी ने बर्तन दिखाया.छोटा ही था) बर्तन रख कर उसमें छेद कर पाईप लगा दिया और ठेले पर मिथेन गैस जला कर चाय बनाने लगा.
एक खुले,बहते हुए नाले पर एक छोटे बर्तन से पाईप द्वारा दबाव से निकली गैस से ऐसे चूल्हा नहीं जलेगा.यह संभव नहीं है.

प्रश्न यह नहीं है कि क्या कचरे / नाली से निकली मिथेन / ज्वलनशील गैसों के उपयोग से चाय बन सकती है ? सीवेज / लेंडफिल से निकली गैसों का भंडारन कर उपयोग हो सकता है.सब कुछ बन सकता है.उसकी लागत,वायबलिटी/ क्या होगी अलग बात है.
प्रश्न है कि क्या एक चाय के बर्तन की तली में छेद कर उसमें पाईप लगाकर बहते नाले के पानी पर औंधा रख कर निकली गैस द्वारा चाय बनाई जा सकती जैसा प्रधानमंत्री ने दावा किया ? उत्तर है नही.

     

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