Tuesday, December 13, 2016

हॉय पिंकी

हॉय पिंकी
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ब्लेकमनी 'ब्लेक' कहाँ रही
दो हजारी नोटों में बदली
'पिंक' हुई तो पिंकमनी कहें
छोटे में 'पिंकी' कहैं
'गुलाबो' पुकारें 'रोज़ी' कहैं
दिल्ली में महापँडित से पूछें
वहाँ सब कुछ हो जाता है
दरबार में 'विकलांग' जाता है 
आते हुए 'दिव्यांग' हो जाता है

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