Thursday, March 24, 2016

सिलीकान में भेजाफ्राय

सिलीकान में भेजाफ्राय
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अब कौन जाये मथुरा कौन जाये काशी
मन में बस सिलीकान है
रोम रोम में राम बसे
मेरे मन में सिलीकान बसे
सिलीकान चले हम
चुनिया मुनिया झगड़ू दगडू
गुल्लू चमली साथ चलें हम
सिलीकान के चिप्स तले हम
शुतरमुर्ग के साथ चले हम
जुकरबर्ग के पास चले हम
इधर गुगल उधर याहू
याहू..याहू...याहू.....!
चाहे कोई मुझे जंगली कहे
कहता है तो कहता रहे
हम सिलीकान के दीवाने हैं
हम अब क्या करें
राधा ने माला जपी तेरे नाम की
मैनें ओढ़ी डिज़ीटल चुनरिया सिलीकान की
लाली मेरे लाल की जित देखूँ सिलीकान
लाली देखन मैं गया हो गया हलकान
कण कण में भगवान
हर तरफ़ सिलीकान
जय सिलीकान
दास 'क(जस)बीर' जतन से ओढ़ी
ज्यों की त्यों रख दिनीं चुनरिया








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