कश्मीर घाटी
—————
बहुत ख़ुश हैं इन दिनों घाटी के लोग
अपनें अपनें घरों में बंद हैं घाटी के लोग
टीवी नैट फोन अखबार सब बंद हैं
बिना खबरों के मजे में हैं घाटी के लोग
किसी को अखरोट सेब के बाग नही जाना
बिन ख़रीदार नाराज नहीं घाटी के लोग
अब मजदूरों को काम की जरुरत कहाँ रही
कितनें सब्र जिग़र वाले हैं घाटी के लोग
किसी को डल पर शिकारा चलाना नहीं है
टुरिस्ट बिना गुज़ारा कर लेंगे घाटी के लोग
बच्चों को अब स्कूल कालेज नहीं जाना
बिना पढ़े भी कितने खुश हैं घाटी के लोग
बिना पानी दवाई दूध सब जी सकते हैं
फिर भी कितनें खुशहाल हैं घाटी के लोग
किसी जश्न दावत शादी में जाना नहीं
कितना ज्यादा पैसा बचा रहे घाटी के लोग
घरों में बंद सब तीन सौ सत्तर खेल रहे
कितनें अल्लाह वाले हैं घाटी के लोग
अगर फिरदोस बर-रू-ए-ज़मीं अस्त
इसी जन्नत में रह रहे घाटी के लोग
☘ जसबीर चावला
—————
बहुत ख़ुश हैं इन दिनों घाटी के लोग
अपनें अपनें घरों में बंद हैं घाटी के लोग
टीवी नैट फोन अखबार सब बंद हैं
बिना खबरों के मजे में हैं घाटी के लोग
किसी को अखरोट सेब के बाग नही जाना
बिन ख़रीदार नाराज नहीं घाटी के लोग
अब मजदूरों को काम की जरुरत कहाँ रही
कितनें सब्र जिग़र वाले हैं घाटी के लोग
किसी को डल पर शिकारा चलाना नहीं है
टुरिस्ट बिना गुज़ारा कर लेंगे घाटी के लोग
बच्चों को अब स्कूल कालेज नहीं जाना
बिना पढ़े भी कितने खुश हैं घाटी के लोग
बिना पानी दवाई दूध सब जी सकते हैं
फिर भी कितनें खुशहाल हैं घाटी के लोग
किसी जश्न दावत शादी में जाना नहीं
कितना ज्यादा पैसा बचा रहे घाटी के लोग
घरों में बंद सब तीन सौ सत्तर खेल रहे
कितनें अल्लाह वाले हैं घाटी के लोग
अगर फिरदोस बर-रू-ए-ज़मीं अस्त
इसी जन्नत में रह रहे घाटी के लोग
☘ जसबीर चावला
No comments:
Post a Comment