Monday, May 7, 2018

क्या है तुम्हारी मुख्यधारा

क्या है तुम्हारी मुख्यधारा 
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मैं मुख्यधारा में शामिल नहीं हूँ
जिसे होना हो तो हो
है क्या तुम्हारी मुख्यधारा 
धर्म के पाखण्ड पर्वत से निकली
सांप्रदायिक गंदे नाले से पटी
नफरत की उफनती नदी  ?                   
वर्ण व्यवस्था के घाट से बहती
हिंसक उन्माद की नालियाँ मिलती 
लाशें बहती इस मुख्य धारा में 
जली बस्तियों की राख गिरती 
कहाँ है कल कल की निश्छल आवाज 
अनूगूँज है क्रंदन,विलाप,दहाड़ों की 

प्रेम सद्भाव बहा ले जाती
संविधान के तटबंधों को धता बताती
न्यायिक हदों को तोड़ती
अधिनायकवाद की भूमि पर बह रही मुख्यधारा 
तुम्हे मुबारक तुम्हारी मुख्यधारा

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