काग भगौड़ा ~ ~ ~ ~ ~ ~ ᒍᗩᔕᗷIᖇ ᑕᕼᗩᗯᒪᗩ
Wednesday, June 15, 2022
आवाज़ें जो बदल गईं
आवाज़ें जो बदल गईं
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आवाज़ें जो कभी बुलंद थीं
तुतलाने लगीं
धीरे धीरे अस्पष्ट हुईं
अटपटी हुईं
फुसफुसाने लगी
कातर ध्वनि में बदली
गिड़गिड़ाने लगी
निज़ाम का सदक़ा
मुँह जोहने लगी
निज़ाम की भाषा में निज़ाम के नग़मे गाने लगी.
🦉 जसबीर चावला
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