क़िस्सा-ए-फेंकूँ लाल
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शहर का फेंकूँ लाल गाँव में पहली बार अपनी ससुराल गया.सबेरे लोटा लेकर खेतों में फारिग होने निकला और थोड़ी देर में हाँफता हुआ वापस आ गया.लोगों ने पूछा जँवाई राजा क्या हुआ.
फेंकूँ लाल बोला मैं झाड़ियों में उकड़ूँ बैठने ही वाला था कि देखा २० शेर चले आ रहे हैं.सुनकर गाँव में सन्नाटा छा गया.
इस पर गाँव के एक व्हिसल ब्लोअर नौजवान ने कहा कि इस इलाक़े में २० शेर नहीं हो सकते.फेंकूँ लाल ने पलट कर कहा तो १० शेर ज़रूर होंगे.किसी ने कहा कि गाँव की सुरक्षा और इज़्ज़त का मामला है.इतने शेर भी नहीं होंगे सोच कर बताओ.फेंकूँ लाल ने कहा कि २ तो ज़रूर थे ही.व्हिसल ब्लोअर नौजवान ने कहा जँवाई राजा इस इलाक़े में शेर तो क्या तेंदुए,लोमड़ी भी नहीं है.सोचो आख़िर हुआ क्या ?
फेंकूँ लाल बोला मैं जैसे ही झाड़ियों की तरफ़ बड़ा बड़ी ज़ोर से आवाज़ हुई और एक ख़रगोश तेज़ी से भागा.मैं डर गया और बिना फ़ारिग हुए भाग आया.मेरे कपड़े देख रहे हो ?
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