झूठ का बोलबाला
——————-
उसने एक बार ‘सच’ शब्द बोलने का प्रयास किया
ज़बान ऐंठने लगी
मुँह सूख गया
‘सच’ गले में फँसा
मुँह से बाहर न निकला
झूठ को पुकारा
‘झूठ’ अंदर तैयार बैठा था
दौड़ा चला आया
सच पर आवरण डाला
जब भी अब मुँह खोलता है
झूठ धड़ल्ले से बाहर निकलता है
☘️ ज स बी र चा व ला
No comments:
Post a Comment