Friday, November 6, 2020

झूठ का बोलबाला

 झूठ का बोलबाला 

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उसने एक बार ‘सच’ शब्द बोलने का प्रयास किया 
ज़बान ऐंठने लगी
मुँह सूख गया
‘सच’ गले में फँसा
मुँह से बाहर न निकला
झूठ को पुकारा 
‘झूठ’ अंदर तैयार बैठा था 
दौड़ा चला आया
सच पर आवरण डाला
जब भी अब मुँह खोलता है 
झूठ धड़ल्ले से बाहर निकलता है

☘️ ज स बी र   चा व ला

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