Tuesday, May 17, 2016

सूखा और सिंहस्थ

सूखा और सिंहस्थ

बुंदेलखण्ड में सूखा था
घास की रोटी खा कर मर गये 
बिना घास भी मर गये
पानी पाताल लोक में था
बिन पानी मोक्ष पा गये
न खबर थी न फोटू 
न आँख से टपके आँसू
ओह ! टीवी का सूखा भी कितना रंगीन था

सिंहस्थ में पानी ही पानी था
बस आँख का पानी मरा था
ए सी कॉटेज में पसरा धर्म
सत्ता डुलाती सोने का चँवर 
चाँदी की थाली में ज्योंना परोसा 
छप्पन पकवान जीम रहा धर्म 
अहा ! क्षिप्रा का किनारा हरा ही हरा था

🌿 जसबीर चावला 

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