सूखा और सिंहस्थ
बुंदेलखण्ड में सूखा था
घास की रोटी खा कर मर गये
घास की रोटी खा कर मर गये
बिना घास भी मर गये
पानी पाताल लोक में था
बिन पानी मोक्ष पा गये
न खबर थी न फोटू
न आँख से टपके आँसू
ओह ! टीवी का सूखा भी कितना रंगीन था
सिंहस्थ में पानी ही पानी था
बस आँख का पानी मरा था
ए सी कॉटेज में पसरा धर्म
सत्ता डुलाती सोने का चँवर
चाँदी की थाली में ज्योंना परोसा
छप्पन पकवान जीम रहा धर्म
अहा ! क्षिप्रा का किनारा हरा ही हरा था
🌿 जसबीर चावला
No comments:
Post a Comment