कटी दुमों का मौसम
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कटी दुमों का मौसम
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दुम
चला चली की आशंका
हो चली गुम
पद पैसा पद्म के लिये हिलती दुमें
कुर्सी के लिये अकुलाती दुमें
बुद्धिजीवी पत्रकार दुम
लार टपकाती
अकादमिक समाजसेवी की दुम
ज़ोर जोर से हिल रही दुमें
टाँगों के मध्य दबी दैन्य दुमें
दासभाव ओड़े दमदार दुमें
नये दुम काल के नये समीकरण
जिसका राज उसके पूत
सिरे से कटी दुम बोली बोझ है यह
तीन सौ साठ डिग्री घुमा दो
अब दुम का नहीं दुमछल्लों का काम है
पीछे देखो कहीं हिल न जाये
टाँगों के बीच दब न जाये
सलामत रहे तुम्हारी दुम
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